कमबख्त नींद है के जाती नहीं!!!

कमबख्त नींद है के जाती नहीं!!!

रोज़ एक काम लेकर  बैठती हूँ
लेकिन  वो कर पाती नहीं
क्यूंकि कमबख्त ये नींद  है जो जाती नहीं!!!!!!

बहुत हुआ आराम,
कल सुबह से शुरू करुँगी प्राणायाम
ये अलसाई अखियाँ खुल पाती नहीं
कमबख्त नींद है की जाती नहीं!!

सांझ  होते ही फूल सी खिल जाती हूँ ,
आ गया वक़्त सोने का ये गुनगुनाती हूँ
ख़ुशी से बिस्तर पर पसर जाती हूँ
मुस्काते हुए पल्खें झुकाती हूँ

दुनियां की सारी  चिंताएं बस इसी पल  सताती हैं
मेरी प्यारी नींद को दूर मुझसे ले जाती हैं
कितनी भी कर कोशिश दूर समस्याएं कर पाती नहीं
परेशान हूँ मैं ये नींद क्यों अब मुझे आती नहीं

समझा बुझा  के खुद को मैं सुला लेती हूँ
व्ययाम करुँगी कल से ये प्रतिज्ञा लेती हूँ

अलार्म बजते  ही अखियाँ मिस्मिसाति हैं
स्नूज़ पे डाल  के आराम से फिर सो जाती हैं
कितनी भी  कोशिश करो स्नूज़ की आदत छूट पाती नहीं
कमबख्त ये नींद है की जाती नहीं !!!



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