काश फिर लौटा दे कोई वो बचपन की कश्तियाँ, यारो के साथ की मस्तियाँ !!!!!


बरसात  के साथ यादों का अफसाना  कुछ यूँ चला,
हर नया पुराना रिश्ता दिल को छूने सा लगा !!

कुछ इस तरह ये बूँदें मुझे गद्गुदायीं  
यारो क साथ बिताए हुए पल याद ले आईं 

वो शरारती शामें 
वो चाय की चुस्कियां 
वो बेफिक्री 
वो सावन की लड़ियाँ 

वो शरारत करने पे पापा की सज़ाएं 
वो बीमार होने पे माँ की थपकियाँ !!
दीदी के साथ की हुई मस्तियाँ 
साथ चलायी थी हमने कागज़ की कश्तियाँ !!

सीखी थी सखियों के साथ नयी अदाएं 
ज़ुल्फ़ों मैं गुम होती  फ़िज़ाएं !!

फिर तय किया कुछ दोस्तों क साथ 
नए शहर का सफर,
पढ़ाई खत्म होने क बाद का नया मंज़र 
इन ही बारिशों मैं घूमा था चप्पा चप्पा  हाथ पकड़ कर !!

आधी रात की बारिशें 
वो मिटटी की खुशबुएं !!!

बिना सोये रात भर की थी बातें 
एक दूसरे को हम कितना थे सताते 

वो साथ मिलके गाये हुए गाने 
न जाने हमने बनाए थे कितने अफ़साने !!

बीते हुए सावन के पल कुछ इस तरह गुनगुनायें 
जिनसे  तन्हाई मैं भी महफ़िल जम जाए !!

यारो की यारी, रिशतेदारों की रिश्तेदारी , माँ पापा का दुलार, दीदी का प्यार 
कभी ये हँसा जाए कभी ये रुला जाए !!

काश  फिर से वो बीते हुए पल कोई लौटा जाए

उची इमारत की खिड़की से देखती हूँ जब ये झम झम बरसातें 
याद आता है हर पल जो बिताया था नाचते गाते !!


काश फिर लौटा दे कोई वो बचपन की कश्तियाँ 
  और 
यारो के साथ की मस्तियाँ !!!!!



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